कोदवा. कोदवा में रविवार को एक अवैध क्लीनिक को सील किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में खुलेआम चल रहे अवैध दवाखानों की शिकायत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ध्यान नहीं दे रहा था। इस पर बेरला के नवपदस्थ एसडीएम युगल किशोर उर्वशा ने तत्परता दिखाई। जांच के लिए 4 सदस्यीय टीम बनाई है। टीम ने रविवार को कोदवा के अवैध दवाखाने में दबिश दी। इस दौरान संचालक ने क्लीनिक संचालन संबंधी दस्तावेज नहीं दिखा पाया। इस पर टीम ने क्लीनिक को सील कर दिया है।
खास बात यह है कि क्लीनिक के बाहर बोर्ड पर डॉक्टर के नाम के साथ उसकी डिग्री व पंजीयन क्रमांक लिखा था। क्लीनिक में लकवा और सभी तरह की बीमारियों की अत्याधुनिक मशीन से जांच व इलाज करना भी लिखा था। इसके बावजूद संचालक दस्तावेज नहीं दिखा पाया। कार्रवाई करने वाली टीम में बेरला के नायब तहसीलदार रविंद्र कुर्रे, पौरस वेंताल, हल्का पटवारी प्रेम किशोर यादव और बुडेरा कोटवार उत्तम कौशल शामिल रहे। बेरला एसडीएम युगल किशोर उर्वशा का कहना है कि झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अवकाश के बाद भी टीम ने रविवार को छापेमारी की और एक क्लीनिक को सील किया है।
कार्रवाई से कोदवा सहित क्षेत्र के गांवों में मचा हड़कंप
कोदवा सहित ग्रामीण क्षेत्र में कई अवैध दवाखाने चल रहे हैं। दवाखाना चलाने वाले झोलाछाप डॉक्टर के पास न ही कोई डिग्री है और न ही कोई डिप्लोमा। ये लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर अपनी जेब भर रहे हैं। कार्रवाई से झोलाछाप डॉक्टरों में हड़कंप मचा हुआ है। ऐसे अवैध कारोबारी सकते में आ गए हैं।
भनक लगी, बोर्ड उतार कर क्लीनिक बंद कर दिए थे
प्रशासनिक अमला पहुंचने के पहले झोलाझाप डॉक्टरों को इसकी भनक लग गई थी। इसके चलते कई झोलाछाप डॉक्टर अपनी क्लीनिक बंद कर दिए थे। टीम को पता न चले इसलिए क्लीनिक के बाहर लगे बोर्ड और पोस्टर भी निकालकर छिपा दिए थे। क्योंकि ऐेसे फर्जी डॉक्टरों के पास काेई डिग्री ही नहीं है और क्लीनिक चला रहे हैं। झोलाछाप डॉक्टर जितेन्द्र वर्मा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि प्रशासनिक टीम के आने की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी। इसलिए अपना क्लीनिक को बंद कर बाहर आ गया हूं।