कार्यक्रम में राम माधव ने आजादी के समय की भारत की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का विचार था कि देश में कांग्रेस को अब एक राजनीतिक पार्टी के रूप में काम नहीं करना चाहिए। इसे केवल सामाजिक कामों में ध्यान देना चाहिए। लोगों के बीच आर्थिक भेदभाव, गरीबी खत्म करने पर जुटना चाहिए। लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने गांधी की बात नहीं मानी। इस संबंध में गांधी जी एक प्रस्ताव भी लाने वाले थे लेकिन उनकी मृत्यु हो गई।
राममाधव ने कहा कि आजादी के बाद भी भाषायी गुलामी भी लंबे समय तक बनी रही। आजादी के बाद से अंग्रेजी हावी रही। इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्षेत्रीय भाषाओं को इससे नुकसान हुआ। इसके बाद राममाधव ने छत्तीसगढ़ के राम वनगमन पथ की तारीफ की। साथ ही भारत की साहसी नारी शक्तियों पर चर्चा की। महाभारत के कई कहानियों पर महिलाओं की भूमिकाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नए जनरेशन के युवाओं में मुद्दों को जानने की इच्छा होती है। वे हर एक चीज में प्रश्न करते हैं। हमें उनको बेहतर जवाब देखकर समझाने के लिए सबसे पहले कई हजार सालों के ज्ञान को जानना पड़ेगा।

कार्यक्रम रायपुर लिटफेस्ट सोसायटी की ओर से साहित्य परब 2022 का आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में किशोर वैभव के द्वारा समकालीन साहित्य में समाज और संस्कृति के बारे में भी चर्चा की गई। साथ ही अन्य कई बुद्धिजीवी लोगों ने मंच दे बातें कहि। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का सोमवार को समापन होगा।