यही वजह है कि विनोद के एक बुलावे पर 17 साल पहले राजू श्रीवास्तव बिलासपुर आ गए थे। उनकी दोस्ती ऐसी थी कि राजू ने विनोद के नाम से कॉमेडी आइटम भी बनाया था, जिसे काफी पसंद किया गया। राजू ने उस आइटम का नाम दिया था विनोद भाई की बहन की शादी।

राजू श्रीवास्तव के निधन पर उन्हें याद करते हुए विनोद पटेल ने बताया कि साल 1997 में वो फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के लिए मुंबई गए थे। उस समय वो इंडस्ट्री में जाने के लिए बहुत स्ट्रगल कर रहे थे। विनोद मुंबई के घाटकोपर में 1997 से 2004 तक रहे। तब राजू श्रीवास्तव भी कानपुर से आकर मेहनत कर रहे थे।
वहीं मुंबई में ही दोनों की मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया कि राजू चाय ठेले में बैठकर हमेशा चाय पीते थे। मैं भी उनके साथ बैठकर चाय पीता था। इसी दौरान राजू को लाफ्टर चैलेंज में काम करने का मौका मिला, फिर उनको कॉमेडियन का नया नाम मिला। इसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस बीच विनोद 2004 में बिलासपुर आ गए और यहां आकर इवेंट का काम शुरू किया। विनोद बताते हैं कि राजू भाई ने मेरे नाम से कॉमेडी आइटम बनाया था, जिसे विनोद भाई की बहन की शादी का नाम दिया था। राजू इस टाइटल के नाम से लोगों को काफी हंसाते थे और वह काफी हिट हुआ था।

2005 में कराया राजू का लाफ्टर शो
विनोद पटेल ने बताया कि राजू श्रीवास्तव लाफ्टर शो करने लगे, तब साल 2005 में उन्हें बिलासपुर बुलाया था। पर्यटन और संस्कृति विभाग के माध्यम से तिलकनगर स्थित वाजपेयी मैदान में उनका शो कराया था। इस आयोजन में प्रदेश के नामचीन कलाकारों का सम्मान किया गया था। कार्यक्रम में जबलपुर के केके नायकर भी आए थे। तब राजू भाई ने कहा था कि नायकर को वे गुरु मानते हैं।

प्रमोद सिंह ने तीन बार कराया राजू श्रीवास्तव का शो
शहर के इवेंट ऑर्गेनाइजर प्रमोद सिंह ने कहा कि राजू श्रीवास्तव बातचीत में लोगों को हंसाते थे। उनके शो के लिए कोई स्क्रिप्ट तैयार नहीं करता था। बल्कि, वे खुद अपना स्क्रिप्ट तैयार करते थे। दरअसल, राजू श्रीवास्तव हर बात पर हंसी मजाक करते थे और लोगों को गुदगुदाते थे। साथ ही हास्य व्यंग्य भी बड़े रोचक तरीके से करते थे। उन्होंने प्रमोद सिंह का नाम लेते हुए कहा था कि इनका नाम प्रमोद है। अमोद और प्रमोद का मतलब मनोरंजन होता है और प्रमोद कॉमेडियन (राजू श्रीवास्तव) को बुलाकर लोगों का मनोरंजन करा रहे हैं। यानी की जैसा नाम वैसा इनका काम भी है।

शो के बाद कहा-बहुत भूख लगी है
विनोद और प्रमोद सिंह ने बताया कि राजू श्रीवास्तव जब बिलासपुर आए थे, तब उनका शो खत्म होने में ज्यादा रात हो गई थी। शो के बाद राजू भाई ने कहा कि उन्हें बहुत जोर से भूख लगी है। तब शहर के सभी होटल बंद हो गए थे। उस समय रेलवे स्टेशन के सामने स्थित मुल्कराज होटल देर रात तक खुला रहता था। तब उन्होंने राजू श्रीवास्तव को मुल्कराज होटल ले जाकर खाना खिलाया था।

राजू को वापस बुला रहे थे परिवारवाले
विनोद बताते हैं कि राजू के परिवार की स्थिति अच्छी नहीं थी। इसके बाद भी वे फिल्म इंडस्ट्री में काम करने कानपुर से मुंबई गए। वहां उन्होंने काफी मेहनत की। एक समय ऐसा भी आया कि जब राजू को कोई काम नहीं मिल रहा था, तब उनके परिवार वाले उन्हें वापस बुला रहे थे और कानपुर में ही जॉब करने की सलाह दे रहे थे। लेकिन, राजू ने हार नहीं मानी और अपना मेहनत जारी रखा, जिसके बाद उन्हें कामयाबी मिली और उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।