ये कहानी हैं अमेजन कंपनी में बड़े पद पर काम करने वाली हिमजा अप्पाराशेरुवु की, जिनका जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ। जब हिमजा पढ़ाई करने शहर से बाहर निकलीं, तब दुनिया को दैखा और जाना। करियर में ग्रोथ की और साथ में दो बच्चों की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली। इसी के साथ खुद के पैशन को भी फॉलो किया। वह एक ट्रेंड जुंबा इंस्ट्रक्टर, यूट्यूबर, डांसर और मैराथन रनर भी हैं। पढ़िए हिमजा अप्पाराशेरुवु की कहानी उन्हीं की जुबानी।
न हिंदी आती थी न अंग्रेजी
मैं आंध्र प्रदेश के एक छोटे से शहर अनंतपुर की रहने वाली हूं, जहां हमें सातवीं कक्षा तक बैठने के लिए बेंच नहीं मिलती थी। स्कूल में पढ़ाई के लिए कोई तय एजुकेशन सिस्टम भी नहीं था। यहां तक कि मुझे कक्षा 11वीं में पहुंचने तक आईआईटी, एनआईटी या आईआईएम के बारे में कुछ भी नहीं पता था।
जीरो से सफर शुरू करने से लेकर आज मैं जहां पहुंची हूं, वहां तक आना आसान नहीं था। इंजीनियरिंग एंट्रेस एग्जाम पास करना तो एक बार को फिर भी आसान है, लेकिन कॉलेज जाकर एलियन बिहेवियर का सामना करना काफी मुश्किल। मुझे आज भी याद है मेरा कॉलेज का पहला दिन कैसा था। मेरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी रुड़की से हुई है। जब मैं कॉलेज पहुंची तब मुझे न ठीक से इंग्लिश आती थी और न ही हिंदी में ठीक से बात कर पाती थी। मगर अपने दृढ़ निश्चय के साथ मैं हर चुनौती को पार करती चली गई, और जीवन में बहुत कुछ सीखते हुए सफलता की ओर बढ़ती रही।

अमेजन में मेरा करियर और काम
इंजीनियरिंग के बाद मैंने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया सिडनी में यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स से एक्सजेंट टर्म पूरा किया।
साल 2017 में मैंने अमेजन कंपनी में बतौर सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर सप्लाई चेन एक्जीक्यूशन टीम की पोस्ट पर जॉइन किया। अमेजन में मैंने एलेक्सा पर काफी काम किया। ‘लर्न विद एलेक्सा’ ‘पे विद एलेक्सा’ जैसे फीचर लेकर आई। क्योंकि मैं यह भी समझती थी कि आज के समय में स्टूडेंट्स हो या वर्किंग प्रोफेशनल्स उनके लिए अंग्रेजी आना कितना जरूरी है। इस जरूरत को मैंने खुद महसूस किया है इसलिए मैंने अमेजन एलेक्सा के अंदर इंटरएक्टिव स्किल को शामिल किया। ‘विद्या’ नाम की इस स्किल से किसी भी उम्र के लोगों को अंग्रेजी बोलना सिखाया जाता है। मैं अमेजन के टैक्सलेस टैक्स डिवीजन में बतौर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट मैनेजर काम कर रही हूं।
बच्चों के लिए दो बार ली मैटरनिटी लीव, पति और कंपनी ने दिया साथ
मैंने अपने करियर के साथ ही अपनी फैमिली पर भी पूरा ध्यान दिया है। करियर में आगे बढ़ते हुए ही मुझे दो बार मां बनने का सौभाग्य मिला और मैंने दो बार मैटर्निटी लीव ली। इस दौरान दिक्कतें तो काफी आईं, मगर मेरे साथ हमेशा मेरे पति सपोर्ट के लिए खड़े रहे।
मैं पूरी तरह से अपने बच्चों के लिए मौजूद रहती हूं और उनकी हर जरूरत को पूरा करती हूं, फिर चाहे उनका होमवर्क कराना हो या परीक्षाओं की तैयारी, या फिर उनके साथ खेलना और मस्ती करना हो।
मेरी दिनचर्या में मेरे पति सबसे मजबूत सपोर्ट सिस्टम हैं, वो एक जीवनसाथी और एक अभिभावक की पूरी जिम्मेदारी निभाते हैं। हम अपने बच्चों की व्यक्तिगत रूप से देखभाल करने और उनके साथ समय बिताने में यकीन करते हैं। मेरा मानना है कि चाहे आप परिवार के साथ हों, या काम पर, आपको हर पल में पूरी तरह से मौजूद होना जरूरी है। मैं इन दोनों के बीच समान संतुलन बनाती हूं। मुझे अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना और नई गतिविधियां करना पसंद है।

@in affinity group से करियर और पेरेंटिग के बीच का संतुलन सीखा
मैं एमेजॉन कंपनी के एफ़िनिटी समूह Families@IN से जुड़ी हूं, जिसमें सभी एमेज़ोनियंस जैसे मम्मी, पापा, अभिभावक, भावी अभिभावक, पेट पैरेंट्स, नॉन-पैरेंट्स – हर कोई हिस्सा लेता है। कामकाजी पैरेंट का काम बहुत मुश्किल होता है, इसलिए यह फोरम अमेजन पर अन्य पेरेंट्स की हेल्प और काउंसलिंग लेने के लिए सबसे सेफ प्लेटफॉर्म है। इससे मुझे अपने काम को कैसे प्राथमिकता देनी है और करियर ग्रोथ को लेकर काफी मदद मिली है।
करियर से ब्रेक लेने के बारे में सोचा तो कंपनी ने की मदद, 70% कैपेसिटी से कराया काम
कोरोना काल सभी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा था। उस टाइम घर का काम करना और ऑफिस संभालना काफी मुश्किल हो रहा था। तब कई बार मैंने करियर के ब्रेक लेने के बारे में सोचा। यहां तक कि अपनी कंपनी में भी बाकी साथियों से इस बारे में सीधे बात की। उन्होंने मेरी परेशानी को समझकर मेरी मदद की। कंपनी ने मुझे 70% कैपेसिटी से काम करने की परमिशन दे दी और उसी हिसाब से जिम्मेदारियां भी दी गईं। अमेजन ने मुझे घर में ऐसा कार्यस्थल स्थापित करने में मदद की, जिससे मुझे मीटिंग्स और शेड्यूल्स में शामिल होने में आसानी रही। इसलिए कोरोना के समय भी मैं अपनी लाइफ में बैलेंस करने में सफल रही।
अपने शौक पूरा करने के लिए रोजाना लेती हूं 1 घंटा
मैं रोज एक घंटा अपने लिए और अपने शौक पूरे करने के लिए देती हूं। इससे मुझे तनाव कम करने और तरोताजा होने में मदद मिलती है। मैं एक लाईसेंस्ड ज़ुंबा इंस्ट्रक्टर हूं और मैं हफ्ते में कम से कम 3 दिन ज़ुंबा क्लास लेती हूं। मैं वीकेंड्स में मैराथन में दौड़ती हूं। मैं अपना यूट्यूब चैनल चलाती हूं, जहां मैं अपने डांस वीडियो शूट करके अपलोड करती हूं।
जुंबा इंस्ट्रक्टर होने के अलावा, मैं एक मैराथन रनर, टेनिस, बैडमिंटन खिलाड़ी और स्क्वैश की शौकीन हूं। मुझे एडवेंचर करना बहुत पसंद है। मैंने अनेक एडवेंचर गतिविधियां, जैसे स्काईडाइविंग, स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, कैनोईंग, बंजी जंपिंग आदि की हैं।

जुंबा क्लासेस लेती हूं, मैराथन दौड़ती हूं, यूट्यूबर भी हूं
जुंबा के साथ मेरा सफर 2010 में शुरू हुआ, जब मैं पहली बार ट्रायल क्लास में गई और इसे पसंद करने लगी। पिछले सालों में मैं जहां भी गई – सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और दुबई वहां जुंबा परिवार से जुड़ी रही। 2019 में मेरी दूसरी प्रेग्नेंसी के बाद मुझे अहसास हुआ कि अब मेरे शौक को अगले चरण में ले जाने और एक सर्टिफाईड ट्रेनर बनने का समय आ गया है। जैसे ही मैंने अपना लाइसेंस लिया और अपनी खुद की क्लासेज शुरू कीं, उसके कुछ समय बाद ही कोविड आ गया और हर चीज पर ताला लग गया।
लेकिन कोविड ने मेरे लिए वर्चुअल दुनिया के दरवाजे खोल दिए, और मैंने ‘हिमजा नारायण’ के नाम से अपना खुद का यूट्यूब चैनल शुरू किया। उम्मीद खोए बिना, मैंने एक साल से ज्यादा समय तक वर्चुअल क्लास चलाए और उसके बाद अपने व्यक्तिगत क्लासेज फिर से शुरू कर दिए। कोविड के दौरान मैंने ऑडियो/वीडियो एडिटिंग सीखी, कोरियोग्राफी से लेकर वीडियो शूट करने, एडिट करने और अपलोड करने तक अपने वीडियो के लिए हर काम खुद किया। डांस और फिटनेस के प्रति मेरे उत्साह से मुझे ये उपलब्धियां हासिल करने में मदद मिली।
मेरा मानना है कि सभी जिम्मेदारियों के बावजूद, हर किसी के लिए यह जरूरी है कि वह खुद के लिए समय निकाले और अपने शौक को पूरा करे।
मदद मांगना कमजोरी नहीं शक्ति का प्रतीक है
मैं हर महिला से एक ही बात कहती हूं कि महिलाओं को एक ऐसा मजबूत सपोर्ट सिस्टम विकसित करना बहुत महत्वपूर्ण है, जो आपको जीवन में आगे बढ़ने में मदद कर सके। किसी को ऐसा जीवनसाथी मिल जाता है, जिस पर वह भरोसा कर सकता है, किसी को माता-पिता या भाई-बहन से सपोर्ट मिलता है, और किसी को विश्वासपात्र मित्र मिल जाते हैं। इसलिए मदद मांगना और सपोर्ट पाना आपकी शक्ति का प्रतीक है, न कि कमजोरी का।